- बस्ता मुक्त दिवस का उद्देश्य विद्यार्थियों के समग्र विकास एवं अन्तर्निहित क्षमताओं को पहचान कर अध्ययन-अध्यापन के पारम्परिक तरीकों से इतर सहगामी क्रियाओं के माध्यम से सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को आनन्ददायी बनाना है। बस्ता मुक्त दिवस माह के प्रत्येक द्वितीय व चतुर्थ शनिवार को मनाया जाना है। उक्त संबंध में विस्तृत निर्देश पृथक से जारी किये जायेंगे।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अन्तर्गत आवंटित टास्क संख्या 147 की क्रियान्विति के क्रम में बस्ता मुक्त दिवस पर प्रत्येक पीईईओ/यूसीईईओ परिक्षेत्र में स्थानीय स्तर पर अपने क्षेत्र विशेष में दक्षता रखने वाले व्यक्तियों को विद्यालय से जोड़कर विद्यार्थियों को उनके अनुभव का लाभ दिये जाने हेतु बस्ता मुक्त दिवस पर 1 घण्टे का सामूहिक सत्र आयोजित किया जाना है। इस हेतु निम्नांकित दिशा-निर्देशों के अनुरूप क्षेत्र विशेष में दक्ष एवं अनुभव रखने वाले स्थानीय स्तर पर विविध क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तियों की पहचान की जाए एवं सूची बनाकर पीईईओ/यूसीईईओ द्वारा सत्र भर का कार्यक्रम निश्चित किया जावे।
- स्थानीय स्तर के लोक/शिल्प कलाकार जैसे बढ़ई, लौहार, रंगरेज, कलाकार आदि, कृषि कार्य से जुड़े व्यक्तियों को आमंत्रित किया जावे।
- व्यापारी अथवा क्षेत्र विशेष के प्रतिभा संपन्न सेवानिवृत्त व्यक्तियों को आमंत्रित किया जावे।
- बच्चों के नैतिक विकास हेतु स्थानीय समाज सेवक/विचारक/उपदेशक के साथ-साथ प्रेरणादायी व्यक्ति जैसे प्रशासनिक अधिकारी, डिफेन्स अधिकारी अथवा बैंक, डाकघर, अस्पताल आदि के अधिकारी/कर्मी, ग्राम सेवक, पटवारी एवं सरपंच आदि को आमंत्रित किया जावे।
- आमंत्रित व्यक्तियों द्वारा उनके संबंधित विभाग/कार्यक्षेत्र की जानकारी से बच्चों को लाभान्वित किया जाए एवं उनके कार्यों के संबंध में प्रयुक्त औजार एवं प्रक्रिया की सामान्य जानकारी दी जा सकती है।
- स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक ज्ञान रखने वाले उक्त व्यक्तियों को स्व प्रेरणा के आधार पर विद्यालय से संबद्ध किया जाना है। इस हेतु इन्हें किसी मानदेय अथवा राशि का भुगतान नहीं किया जाना है।
- विद्यालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पर्व/वार्षिकोत्सव के दौरान इनकी सेवाओं के लिये सम्मानित किया जावे।
- पीईईओ स्तर पर सत्र भर के लिये स्थानीय व्यक्तियों की सूची बनाकर कार्यक्रम निश्चित किया जावे।
- बस्ता मुक्त दिवस के साथ बालिका शिक्षा के तहत किशोरी सशक्तीकरण की गतिविधियां (मीना राजू मंच एवं गार्गी मंच का संचालन) (कक्षा 6 से 12 के समस्त नामांकित विद्यार्थी)।
- विद्यालय में स्वच्छता को बढ़ावा देने हेतु एवं विद्यार्थियों में स्वच्छता का भाव लाने के उद्देश्य से कक्षा 7 एवं उसके ऊपर की कक्षाओं के विद्यार्थियों द्वारा प्रत्येक दूसरे नो-बैग डे के दिन लगाये गये पौधों की सार-संभाल करेंगे।
- यह दिवस विद्यालय के कार्य-दिवसों में गिना जाएगा लेकिन विषयवार कालांश निर्धारण अलग से जारी किया जाएगा।
- 15 अगस्त, 26 जनवरी व 2 अक्टूबर के अतिरिक्त शिविरा पंचांग में दर्शाए गए/मनाए जाने वाले समस्त उत्सव/जयन्तियां सम्मिलित हैं। शिविरा पंचांग में सम्मिलित अग्रांकित गतिविधियों/कार्यक्रमों/क्रियाकलापों के आयोजन बस्ता मुक्त दिवस हेतु निर्धारित समय सारिणी में से 40 मिनट का समय निकालकर विद्यालय संचालन के अन्तिम समय में आयोजित किए जाएंगे। 15 अगस्त, 26 जनवरी तथा 02 अक्टूबर के उत्सव पूर्व की भांति उसी दिन को ही मनाए जाएंगे।
- सम्पूर्ण सप्ताह (सोमवार से रविवार) के दौरान पड़ने वाले उत्सवों/जयंतियों का विधिवत आयोजन प्रार्थना सभा व प्रथम कालांश में ही किया जावे। सप्ताह में अन्य कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाना हो तो आगामी बस्ता मुक्त दिवस (द्वितीय व चतुर्थ शनिवार) को समारोहपूर्वक किया जाए, जिसके लिए रूपरेखा का निर्माण एवं पूर्व तैयारी संबंधित शिक्षकों एवं आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले विद्यार्थियों द्वारा उक्त शनिवार से पूर्व की जाए।
- बस्ता मुक्त दिवस मनाए जाने के कारण समस्त बाल सभाएँ, मासिक स्टाफ बैठक, अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM), SDMC की कार्यकारिणी समिति की मासिक बैठक, मीना-राजू/गार्गी मंच की बैठक इत्यादि कार्यक्रम भी बस्ता मुक्त दिवस (द्वितीय व चतुर्थ शनिवार) के अवसर पर आयोजित किया जाए। माह के अन्तिम शनिवार को उत्सव/जयन्ती/बाल सभा आयोजित करने के उपरान्त समस्त राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा 40 मिनट स्वैच्छिक श्रमदान किया जाएगा।
- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर तथा राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उदयपुर तथा विभिन्न अभिकरणों इत्यादि एवं विभाग द्वारा समय-समय पर विद्यार्थियों में सृजनात्मक कौशल विकास तथा वैज्ञानिक अभिवृत्ति एवं अभिरुचि विकास के उद्देश्य से आयोजित की जाने वाली समस्त प्रतियोगिताएं विद्यालय स्तर पर शनिवार को ही आयोजित करवाई जाएं।
- बस्ता मुक्त दिवस (द्वितीय व चतुर्थ शनिवार) के अवसर पर आयोजित होने वाले उत्सवों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सहशैक्षिक गतिविधियों यथा-खेलकूद, वाद-विवाद प्रतियोगिता, भाषण, निबन्ध-लेखन इत्यादि के आयोजन पर विशेष ध्यान दिया जाए।
- प्रतिमाह एक बाल सभा में गांधीजी द्वारा प्रतिपादित बुनियादी शिक्षा की अवधारणा का ज्ञान विद्यार्थियों को देते हुए पारम्परिक घरेलू कुटीर उद्योग का व्यावहारिक प्रदर्शन करवाया जावे, जैसे मिट्टी के बर्तन/खिलौने बनाना, तकली कातना, चरखे का उपयोग इत्यादि। इस हेतु विद्यालय के आस-पास से कारीगर को विद्यालय में आमंत्रित किया जाकर प्रत्यक्ष प्रदर्शन करने का प्रयास किया जाए।
- विशेष आवश्यकता वाले बालक-बालिकाओं को सहशैक्षिक गतिविधियों में सम्मिलित किया जाए।
समावेशी शिक्षा प्रकोष्ठ (दूरगामी एवं नियमित गतिविधियां)
| क्र.सं. |
क्रियाकलाप |
आयोजन माह/दिनांक |
| 01 |
विशेष आवश्यकता वाले बालक-बालिकाओं का विद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित हो। |
जून से जुलाई 2026 |
| 02 |
विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस |
02 अप्रैल 2026 |
| 03 |
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस |
10 अक्टूबर 2026 |
| 04 |
विश्व विशेष योग्यजन दिवस |
03 दिसम्बर 2026 |